शहर में बच्चों का एक सुन्दर पार्क था ।रात को ये पार्क सुनसान रहता था। रात बारह बजे के बाद उस पार्क में कुछ पारियां खेलने आतीं थीं।

परियों क़ी रानी ने उन्हें सुबह पाँच बजने से पहले अपना खेल खत्म कर वापस परी लोक में आने की अनुमति दी थी । साथ ही चेतावनी दी थी जो परी सुबह

पाँच बजे के बाद एक सेकंड भी पार्क में रहेगी वो कोयल बन जायगी । कोयल बनी परी को सारा दिन उसी रूप में पार्क में ही रहना होगा । रात बारह बजे वह फ़िर परी बन जायेगी तब वह परीलोक आ सकती है । एक दिन एक परी जिसका नाम नीलू था ,खेलते खेलते थक कर एक पेड़ क़ी शाखा पर विश्राम करने लगी। उसे समय का ध्यान ही नहीं रहा कब सुबह के पाँच बज गये। सारी पारियां जा चुकीं थीं । पार्क क़ी घड़ी में पाँच बजे और नीलू कोयल बन गयी । उसे अपनी सहेलियों पर भी गुस्सा आया कि उन्होंने जाते समय उसे क्यों नहीं बुलाया । वह शायद पेड़ की पत्तियों में छुप गयी थी और बाकी पारियों का ध्यान उसकी ओरनहीं गया था।

रात तक उसे कोयल के रूप में ही समय काटना पड़ा ।